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शोहरत की चकाचौंध से परे, हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय सितारे कैसे हँसते और सिसकते हैं, ऐसे सर्वथा अनछुए-अनजाने प्रसंगों के सफर का नाम है ‘यादों का कारवाँ’। सच्ची मगर अनूठी घटनाओं से प्रेरित यह पुस्तक पंद्रह तिलस्मी सितारों के अनमोल जीवन-दर्शन के साथ यह भी दरशाती है कि वे भी कैसे राग-द्वेष के शिकार होते हैं। सरल और सरस भाषा में यह पुस्तक सिनेमा-जगत् के उन पहलुओं से अवगत कराती है, जो आमतौर पर जनता के सामने उजागर नहीं होते। व्यक्तिगत प्रसंगों द्वारा सितारों के बाहरी आवरण के पीछे छिपे सार्थक व्यक्तित्व से मुलाकात के अलावा पुस्तक सत्यापित करती है कि संतों की सूक्ति ‘यश-अपयश विधि हाथ’ कितनी सटीक है, क्योंकि काल के मोहरे होते हुए भी ये कलाकार अगर प्रसिद्धि और धन-दौलत के शिखर फतह करते हैं तो सिर्फ इसलिए कि प्रभु की इन पर विशेष कृपा होती है। संवेदनशील कथाओं के इस संकलन में प्रेरणा के अनेक ऐसे पुष्प गुँथे हैं, जिनसे हर पाठक अपनी जीवन-यात्रा को और अधिक सुरभित सुगंध से निखार सकता है।.
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Novel;