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एक कमरे में दो अजनबी बंद थे। एक था, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (दिल्ली) का छात्र। नाम था, जहरीला बनाम अजातशत्रु बनाम छगनलाल छोटालाल तालपत्री वाला। दूसरी थी, साँपों का जहर निकालनेवाली हाफकिन इंस्टीट्यूट (मुंबई) की छात्रा। नाम था, रेणु पंडित। दोनों एक-दूसरे को तौल रहे थे। कब टकराव होगा, यह कहना कठिन था। फिर भी टकराव तय था। रेणु सावधान हो गई। अजातशत्रु ने चाल बदली। रेणु शिकंजे में फँस गई। वह समय था आधी रात का। आबिद सुरती की यह कहानी है, केवल एक रात की। एक ही रात में दोनों खुद को खोज निकालते हैं। सुबह होने तक दोनों की दुनिया ही बदल जाती है। एक नई निराली शैली में प्रभावपूर्ण उपन्यास, जो रोमांच पैदा करता है और मानव-संबंधों की उथल-पुथल को भी उजागर करता है।
Tags:
Fiction;
Stories;