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पुरानी कहावत है कि ‘जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि’; परंतु आज के संदर्भ में कहा जा सकता है—‘जहाँ न पहुँचे काल, वहाँ पहुँचे जाल (नेट)।’ आज इंटरनेट की उपयोगिता इतनी बढ़ गई है कि यह स्कूल-कालेजों में भी सिखाया जाने लगा है। आज शहरों में कंप्यूटर व नेटवर्क आम चीज बन गई है। कंप्यूटर केवल गणक यंत्र मात्र नहीं है। यह मानव प्रगति को सहायता प्रदान करनेवाला इलेक्ट्रॉनिक यंत्र है। पिछले कुछ वर्षों में कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, ई-कॉमर्स ने संसार को संकुचित बना दिया है। कंप्यूटर विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट संसार का स्वरूप ही बदल देगा।
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