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‘‘महापुरुषों के जीवन और यश की स्मृति, जनसाधारण के चित्त पर उनका प्रभाव और जातीय चरित्र-गठन में उनके द्वारा प्रवर्तित आदर्शों की अनुप्राणना राष्ट्र के लिए अमूल्य संपत्ति और शक्ति का झरना है। उनका चिंतन, विचार और आलोचना, जाति (राष्ट्र) में नित्य नवीन उद्दीपन, उत्साह और सजीवता उत्पन्न करती है। इन पुण्यस्थलों पर जीनवदायिनी जाह्नवी में अवगाहन को किसका मन नहीं चाहेगा।’’ —पं. दीनदयाल उपाध्याय (राष्ट्रीयता का पुण्य-प्रवाह)|
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Indian History;
Theories;