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उड़ने की चाह में पंख तो मिले पर आकाश नहीं मिला एक टुकड़ा आसमान का मेरे आँगन से दिखता पिता ने कहा तू जितनी चाहे उड़ यही तेरा आकाश है मैंने देखा उनकी तरफ मेरा मौन मुखर हो बोला मुझे टुकड़ों में नहीं पूरा आसमान चाहिए उड़ने को सारा संसार चाहिए । - इसी पुस्तक मै
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Self Motivation;
Stories;