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बेनीपुरी की लेखनी की प्रखरता को कौन साहित्य-प्रेमी भुला सकता है। श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी—यह नाम हिंदी संसार के कोने-कोने में एक विशेष प्रकार की साहित्य-साधना और भाषा शैली के लिए प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। प्रस्तुत पुस्तक में बेनीपुरी के चार एकांकी संगृहीत हैं। ‘संघमित्रा’, ‘अमर ज्योति’, ‘सिंहल विजय’, ‘राम-राज्य’— ये चारों एकांकी एक से बढ़कर एक हैं। बेनीपुरीजी की लेखनी का वैभिन्न्य इनमें स्पष्ट नजर आता है। ‘संघमित्रा’ व ‘सिंहल विजय’ में तत्कालीन इतिहास व सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण है तो ‘अमर ज्योति’ में गांधीजी व उनके संघर्षों तथा उनकी पीड़ा की मार्मिक प्रस्तुति है। ‘राम-राज्य’ में गांधीजी के सपनों के राम-राज्य के विपरीत आज जिस तरह राज-काज चल रहा है, उसपर बेनीपुरीजी व्यंग्य के हथौड़े से चोट पर चोट मारते चले जाते हैं, जिसका स्पष्ट स्वर हमें अपने कानों में सुनाई देता है। प्रस्तुत एकांकी हमारी ऐतिहासिक, राष्ट्रीय व वैयक्तिक चेतना को जगाने का कार्य करते हैं।
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Indian History;