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श्री मिश्र प्रकृति से गहराई से जुडे़ हैं, वे काव्य सृजन के लिए बार-बार प्रकृति के पास जाते हैं। प्रकृति भी उनके साथ पूरा सहयोग करती है।वे लोप होती हुई संवेदनाओं के कवि हैं। ‘‘हमारे कवियों की कविता से प्रकृति के विविध अवयव धीरे-धीरे गायब हो गए हैं। ऐसे समय में मिश्रजी की कविताएँ सुखद अनुभूति प्रदान करती हैं।उनके पास भाषा, शिल्प और शब्दों का अद्भुत भंडार है।’’ —प्रोफेसर कुँवर पाल सिंह श्री अरुण मिश्र मूलतः एक सरल, सहज व मौलिक चिंतन क्षमता से ओत-प्रोत व्यक्ति हैं और स्वभावतः कवि हैं। कविताओं व नज़्मों का यह संग्रह श्री मिश्र की सुंदर अंतर्दृष्टि को समेटे हुए शीतल हवा का ऐसा झोंका है, जो न केवल तन का ताप हरने में वरन् मन में सुरभि भरने में भी पूर्णतः सक्षम है। संकलन की प्रत्येक रचना अपने दर्शन, कलेवर, तेवर व अभिव्यक्ति की सामर्थ्य से न केवल मन को आह्लादित-प्रफुल्लित करती है वरन् अपने आप में एक जादुई संसार का सर्जन कर मन के तारों को छू लेने में तथा कभी-कभी छेड़ देने में भी पूर्णरूपेण समर्थ है।
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