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मदांतकी आपने युग के अनुरूप ही मदिरा सेवन के विरुद्ध काव्यात्मक आवाज उठाई है। नशाबंदी में आपकी रचना विशेष रूप से प्रभावपूर्ण सिद्ध होगी। ‘मदांतकी’ में कला की मादकता तो है ही, मदिरा के विषाक्त प्रभाव पर भी विशेष रूप से आपने जोर दिया है। ऐसा उपदेश-युक्त काव्य अपना विशेष महत्त्व रखता है। ——सुमित्रानंदन पंत आधुनिक समाज के लिए यह बहुत ही उपयोगी पुस्तक है। —आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ‘मदांतकी’ नामक आपकी पुस्तक की लोकप्रियता के लिए मेरी शुभकामनाएँ। —डॉ. हरिवंशराय ‘बच्चन’ नशाबंदी विभाग के लिए यह काफी उपयोगी होगी। आपकी रचना सोद्देश्य और मनोरंजक है। —डॉ. प्रभाकर माचवे आपने कई पहलुओं से, खासकर चिकित्सक के पहलू से, मदिरा पर बहुत अच्छा प्रकाश डाला है। यह रचना समय के अनुकूल है। इस रचना का हिंदी-जगत् में अच्छा स्वागत होना चाहिए। —वियोगी हरि.
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Beverage;