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वह अनजान आप्रवासी देश के अंधे इतिहास ने न तो उसे देखा था न तो गूँगे इतिहास ने कभी सुनाई उसकी पूरी कहानी हमें न ही बहरे इतिहास ने सुना था उसके चीत्कारों को जिसकी इस माटी पर बही थीं पहली बूँदें पसीने की जिसने चट्टानों के बीच उगाई थी हरियाली नंगी पीठों पर सहकर बाँसों की बौछारें बहा-बहाकर लाल पसीना वह पहला गिरमिटिया इस माटी का बेटा जो मेरा भी अपना था; तेरा भी अपना।
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History;
Stories;