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पाँच नायिकाएँ महादेवी वर्मा एवं कविवर सुमित्रानंदन पंत की समकालीन साहित्यकार श्रीमती तारा पांडे ने चौदह वर्ष की आयु से ही अपनी प्रेरणा के बल पर अनेक काव्य-संग्रह, गीत-संग्रह, महाकाव्य एवं लघुकथा-संग्रह विद्यादेवी के श्रीचरणों में अर्पित किए। इनकी कविताओं में हिमालयी पवन की पावनता एवं झलमलाते झरनों की धवलता दृष्टिगोचर होती है। प्रस्तुत काव्य-संग्रह ‘पाँच नायिकाएँ’ में भारतीय समाज की श्रेष्ठ पाँच पौराणिक नायिकाओं—सीता, सती, शकुंतला, पांचाली एवं यशोधरा—के जीवन एवं कृतित्व को पद्य रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन कविताओं की अनुभूति की सत्यता और अभिव्यक्ति की प्रवाहशीलता को अनेक विद्वानों ने लक्षित किया है तथा उनके प्रकृति-प्रेम को हृदय से सराहा है। इन कविताओं में कवयित्री ने इन पाँच महाविभूतियों के चरित्रों को लेकर मौलिक चिंतन प्रस्तुत किया है। ‘पाँच नायिकाएँ’ काव्य-ग्रंथ की कविताएँ काव्यात्मक होने के साथ-साथ विचारोत्तेजक एवं मन को झकझोर देनेवाली हैं।
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Fiction;