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कात्यायनी संवाद—सूर्यबाला सूर्यबाला की कहानियाँ प्रदीप्त संपूर्ण राग की तरह हैं। ‘कात्यायनी संवाद’ की कात्यायनी, ‘बिन रोई लड़की’, ‘माइ नेम इज ताता’ की दादी जैसे चरित्र अपनी भावनाओं में जितने ईमानदार हैं, उतने ही विनय और उत्सर्ग से भरे हुए भी। मनुष्यता के तर्क के बाहर उन्हें कुछ भी मान्य नहीं है। अपनी कहानियों के चरित्रों से उतार-चढ़ाव, आकांक्षाएँ, स्वप्न और संघर्ष में बहुत संलग्नता से शामिल हैं सूर्यबाला। जीवन के बहुत ही जटिल भावों और संवेगों की बारीक-से-बारीक हरकत को व्यक्त कर देने की कला उनमें है। सूर्यबाला की समग्र कहानियों में कोई एक बार बारीकी से प्रवेश कर सबकुछ को थाम रहा है तो वह है जीवन के सूक्ष्म सारमय और मानवीयता पर उनका विश्वास। —डॉ. चंद्रकला त्रिपाठी (वरिष्ठ समीक्षिका).
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Fiction;