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तेभ्य: स्वधा इस उपन्यास की कथा भी विस्थापन की त्रासदी की कथा है; परंतु आज तक साहित्य के प्रिय विषय हिंदुस्तान से ससम्मान विस्थापित हुए लोगों की करुण कथा नहीं बल्कि पाकिस्तान से भगाए गए हिंदुओं की यंत्रणा कथा, विस्थापित होकर राजौरी की घाटियों में शरण लिये निरपराध हिंदुओं की त्रासद कथा, सन् ’47 में भारत-विभाजन के बाद हुए कबाइली आक्रमण और उनकी बर्बरता के घिनौने स्वरूप की कथा। कई हजार हिंदुओं की कत्लगाह बनी राजौरी और आस-पास की घाटियाँ; बलात्कार, अपहरण और छीन-झपट की मूक साक्षी बनी पहाड़ियाँ और बर्फ बना दी गई जिंदगियों के नीचे दबी आग और प्रतिशोध की कथा।और जातीय स्मृतियों की कथा।
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Novel;