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इस संकलन में राजनैतिक विमर्श या इतिहास बोध की कविताएँ नहीं हैं; अधिकांश प्रेम कविताएँ हैं, जो एक लंबे अरसे में लिखी गईं। कई कविताएँ एक देश में प्रारंभ हुईं और किसी दूसरे देश में समाप्त हुईं। कई कविताएँ दूरदर्शन पर गाई जा चुकी हैं और कुछ व्यक्तिगत गोष्ठियों में। कुछ नज़्में और ़गज़लें ‘दिल है ऩगमा निगार’ और ‘तुम्हारे प्यार का मौसम’ सी.डी. में संकलित हुई हैं। कुछ कविताएँ मेरे मित्र फेसबुक ग्रुप ‘एप्रिल इज नॉट द क्रूएलेस्ट मंथ’ पर प्रसारित होकर प्रशंसित हो चुकी हैं। मन के भावों को पुस्तक का रूप देना आसान नहीं होता। विशेषकर भारतीय समाज में प्रेम कविताएँ लिखना और प्रकाशित करना एक बहुत बड़ा ़खतरा मोल लेनेवाली बात है। मैं इस बात का कोई जवाब नहीं दूँगा कि ये कविताएँ किसके लिए लिखी गई हैं। जिसके लिए लिखी गई हैं, उसे मालूम है। इसलिए इसका शीर्षक: तुम्हारे लिए, बस।
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Novel;