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प्रस्तुत सभी कहानियाँ लेखक की जन्मभूमि उत्तराखंड के जन-जीवन से संबंधित हैं। अधिकांश कहानियाँ लेखक द्वारा गढ़ी गई हैं किंतु कुछ कहानियाँ लोक में यत्र-तत्र बिखरी पड़ी, बहुधा लोकस्मृति में बसी हुई भी हैं, जिन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ लेखक ने शब्दों में पिरोया है। इस संग्रह में सम्मिलित कहानियाँ अनेकानेक भावभूमियों पर आधारित हैं। सचमुच इन 32 कहानियों का वर्गीकरण करना हो तो कदाचित् एक दर्जन वर्ग निर्धारित करने पड़ेंगे। इनमें लोककथाएँ हैं, कहावतों पर आधारित कहानियाँ हैं, सैकड़ों वर्षों से लोकजीवन में दंतकथा के रूप में जीवित कहानियाँ हैं। इस संग्रह में पर्वतीय वीरों की कथाएँ हैं तो शृंगार और वात्सल्य की कहानियाँ भी हैं। इतना ही नहीं, इनसे पर्वतीय जीवनशैली, पर्वतीय देवी-देवताओं, मान्यताओं, विश्वासों तथा रीति-रिवाजों के संबंध में अनायास ही नई-नई जानकारियाँ पाठकों को प्राप्त होती हैं। लैंदी, खबोड़ और गलदार जैसे पहाड़ी बोली के सैकड़ों शब्दों का परिचय भी सहज ही हो जाता है। हिमगिरि के गौरव का जयघोष करनेवाली एक पठनीय कृति।.
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Novel;