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प्रखर पत्रकार एवं संपादक श्री एम.जे. अकबर ने इस चिंतनपरक पुस्तक में पिछले दशक पर एक व्यापक और गहरी निगाह डाली गई है, जो कि ऐसा काल था, जिसके टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर प्रतिष्ठाएँ ध्वस्त हुईं और घटनाएँ भी प्रवाह के बजाय जमावड़े के रूप में सामने आईं। भ्रष्टाचार, आतंकवाद, विलंबित न्याय, अधिकारों का उल्लंघन और सरकारी वादाखिलाफी का इतिहास राजनीतिक क्षेत्र से इतर हँसी के पात्र बन गए। इनके किरदार भी असाधारण रहे। हमारे विभाजित उपमहाद्वीप के संस्थापकों से लेकर भविष्य को आकार देनेवाले आज के लोग इसमें शामिल रहे। यह पुस्तक खासतौर पर इसलिए विशिष्ट है, क्योंकि इसमें अकबर की अचूक निगाह ने वर्तमान घटनाओं के कारणों और उनके संभावित परिणामों का विश्लेषण, स्पष्ट वाक्यों और अपनी ही विशिष्ट शैली में किया है। पुस्तक में राजनीति, क्रिकेट, फिल्म तथा समाज के लगभग सभी पहलुओं पर उनकी बेबाक राय पाठक को सोचने पर विवश करेगी। भविष्य में सामाजिक अंतर्विरोधों के समाधान का मार्ग खोजने के प्रयासों को भी बल देगी|
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Politics;
Theories;