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भर्तृहरि संस्कृत के लोकप्रिय कवियों में से एक हैं। संस्कृत साहित्य में उनकी तीन कृतियाँ—‘नीति-शतक’, ‘शृंगार-शतक’ एवं ‘वैराग्य-शतक’ प्रसिद्ध हैं। यद्यपि कवि के रूप में भर्तृहरि का कृतित्व इन तीन शतकों तक ही सीमित है, किंतु गुणात्मक दृष्टि से उसे कवित्व व काव्यकला की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि माना जा सकता है। ‘नीति-शतक’ के सम्यक् अनुशीलन से ज्ञात होता है कि भर्तृहरि ने दुनिया को बड़ी गहराई तथा सूक्ष्म दृष्टि से देखा-समझा था। वस्तुतः कवि ने इस शतक में लोक-व्यवहार, सांसारिक जीवन तथा मानव चरित्र व मानव-मूल्यों के सभी महत्त्वपूर्ण पक्षों का मर्मस्पर्शी विवेचन किया है। भर्तृहरि मनुष्य के व्यक्तित्व में निहित समस्त उदात्त संभावनाओं के चरम उत्कर्ष को अपना अंतिम आदर्श मानते हैं; लेकिन सांसारिक जीवन की विसंगतियों, विकृतियों व क्षुद्रताओं को भी उन्होंने बेझिझक अनावृत किया है। आशा है, ‘नीति-शतक’ का मुक्तछंद में किया गया यह अभिनव हृदयग्राही अनुवाद सुधी पाठकों को उसके अनुपम काव्य-सौंदर्य का आस्वादन कराने में सफल होगा।.
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