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इस संकलन में प्रस्तुत लेख सन् १९८६ से २००३ तक लिखे गए हैं। इन लेखों में अयोध्या आंदोलन के विभिन्न चरणों एवं रूपों का विहंगम चित्र प्रस्तुत किया गया है। लेखक स्वयं इस विवाह के ऐतिहासिक पक्ष से जुड़ी बहस में सहभागी रहा है। इन लेखों को पढ़ने से प्रकट होगा कि लेखक ने अयोध्या प्रश्न को एक स्थानीय मंदिर-मसजिद के रूप में देखने की बजाय विदेशी आक्रमणकारियों की मजहबी असहिष्णुता एवं विस्तारवाद की मध्य युगीन विचारधारा की विध्वंस लीला के क और प्रतीक के रूप में देखता है। लेखका का मानना है कि इस विध्वंस लीला के लिए भारतीय मुसलमानों की वर्तमान पीढ़ी को कदापि उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता; किंतु यह भी उतना ही सच है कि जब तक उनकी वर्तमान पीढ़ी मजहबी असहिष्णुता और विस्तारवाद, हिंसा और विध्वंस की उस मध्य युगीन विचारधारा से संबंध-विच्छेद करके अपनी इसलाम पूर्व की ऐतिहासिक परंपरा को शिरोधार्य नहीं करती तब तक खंडित भारत में राष्ट्रीयता और पंथनिरपेक्षता का पौधा लहलहा नहीं सकता। इसलिए लेखक की दृष्टि में अयोध्या आंदोलन अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक समाजों में वर्चस्व का युद्ध न होकर राष्ट्रीयता और पंथनिरपेक्षता के सनातन भारतीय आदर्श के साथ भारतीय मुसलमानों को जोड़ने का एक रचनात्मक राष्ट्रीय आंदोलन है।.
Tags:
History;
Religious;