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पैगंबर साहब शांति व अहिंसा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने शांति को सबसे बड़ी अच्छाई के रूप में स्थापित किया और इस बात पर बल दिया कि इसके लिए सभी प्रकार की नकारात्मक सोच को दूर करना तथा प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे दोस्त के रूप में देखना आवश्यक है। यही इसलामी शिक्षा का सार है। इसलाम शांति को सर्वोच्च स्थान देता है। मौलाना वहीदुद्दीन खान के ये लेख इसलाम की सच्चाई को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का उपक्रम हैं। इस संसार में जहाँ संस्कृतियों, धर्मों तथा जातियों की बहुलता लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती है, वहीं शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व ही जीवन का एकमात्र तरीका है। फिर भी, आज हम अपने आसपास जो कुछ देखते हैं, वह इसके एकदम विपरीत है। आत्ममंथन के अभाव के साथ ही धर्मों की गलत व्याख्या युवकों को गुमराह कर रही है। जीवन के इन छोटे-छोटे अनुभवों के माध्यम से मौलाना वहीदुद्दीन खान एक सौहार्दपूर्ण व शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान कर रहे हैं, जो किसी भी समाज की सफलता के लिए सबसे अनिवार्य आवश्यकता है। देश-समाज के प्रति सरोकार रखनेवाले हर चिंतनशील व्यक्ति के लिए एक पठनीय पुस्तक।.
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