Lalitaditya

Lalitaditya

₹ 369 ₹450
Shipping: Free
  • ISBN: 9789352669219
  • Author(s): Vrindavan Lal Verma
  • Publisher: Prabhat Prakashan (General)
  • Product ID: 573445
  • Country of Origin: India
  • Availability: Sold Out
Available on SOD This book is available on our Supply on Demand (SOD) feature. It will be procured after your order. Dispatch can take 1-3 working days. Know more.
Check delivery time for your pincode

About Product

राजा ने यथाशक्‍त‌ि नम्रता के साथ कहा-' हम कश्मीर नरेश, भारत सम्राट‍् ललितादित्य हैं । तुक्खर देश की ओर जा रहे हैं । ' साधु के मुख पर आश्‍चर्य की एक रेखा तक नहीं खिंची । उसी मा, तटस्थता के साथ बोला-' जानते हो, पूर्वजन्म में क्या थे?' राजा के भीतर विनय की बाढ़-सी आ गई । नम्रता के साथ उत्तर दिया-' मैं नहीं जानता, जान ही नहीं सकता । आप योगी हैं, अवश्य हैं । आप ही बतलाइए ।' साधु ने कुछ क्षण ध्यान लगाने के बाद कहा-' तुम पूर्वजन्म में एक समृद्ध गृहस्थ के नौकर थे, जो खेती कराता था । तुम उसका हल जोतते थे । वह गाँव श्रीनगर से बहुत दूर है जहाँ तुम उस भूमि-स्वामी के खेतों में हल जोतकर अपना जीवन चलाते थे । जिन दिनों तुम हल चलाते, भूमि-स्वामी तुम्हारे लिए खेत पर रोटी औंर पानी भेजता था । एक दिन गरमी की ऋतु में बड़े-बड़े बैलों का भारी हल चलाते-चलाते थक गए । दिन- भर हल चलाया, परंतु न रोटी आई और न पानी मिला । आसपास कहीं भी पानी था ही नहीं । भूख और प्यास के मारे तुम्हारा गला सूख गया । तड़प रहे थे कि थोड़ी- सी दूरी पर रोटी-पानी लानेवाला दिखलाई पड़ा । प्रसन्न हो गए । वह एक मोटी रोटी लाया था और एक छोटा-सा घड़ा पानी का । तुमने खाने के लिए हाथ-मुझेहाँह धोया ही था कि कहीं से एक ब्राह्मण हाँफता- हाँफता तुम्हारे पास आकर बोला-' मत खाओ, मैं भूखों मरा जा रहा हूँ ' । -इसी पुस्तक से.

Tags: Fiction; Stories;

Related Books

Aginkhor
Aginkhor
₹ 391 ₹ 395
Shipping: Free
Ek Duniya : Samanantar
Ek Duniya : Samanantar
₹ 213 ₹ 250 14.8%
Shipping: ₹ 75

97698+ Books

Wide Range

44+ Books

Added in last 24 Hours

2000+

Daily Visitor

8

Warehouses

Brand Slider

BooksbyBSF
Supply on Demand
Bokaro Students Friend Pvt Ltd
OlyGoldy
Akshat IT Solutions Pvt Ltd
Make In India
Instagram
Facebook